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Tuesday, August 20, 2013

Reality .... Must Read

Reality .... Must Read
इस नालायक सरकार ने इंदिरा गाँधी को एक बहुत ही जिम्मेदार , ताकतवर और राष्ट्रभक्त महिला बताया हैं , चलिए इसकी कुछ कडवी हकीकत से मैं भी आज आपको रूबरू करवाता हूँ !!! इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू राजवंश में अनैतिकता को नयी ऊँचाई पर पहुचाया. बौद्धिक इंदिरा को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहाँ से जल्दी ही पढाई में खराब प्रदर्शन के कारण बाहर निकाल दी गयी. उसके बाद उनको शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन गुरु देव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें उसके दुराचरण के लिए बाहर कर दिया. शान्तिनिकेतन से बहार निकाल जाने के बाद इंदिरा अकेली हो गयी. राजनीतिज्ञ के रूप में पिता राजनीति के साथ व्यस्त था और मां तपेदिक के स्विट्जरलैंड में मर रही थी. उनके इस अकेलेपन का फायदा फ़िरोज़ खान नाम के व्यापारी ने उठाया. फ़िरोज़ खान मोतीलाल नेहरु के घर पे मेहेंगी विदेशी शराब की आपूर्ति किया करता था. फ़िरोज़ खान और इंदिरा के बीच प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो गए. महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्री प्रकाश नेहरू ने चेतावनी दी, कि फिरोज खान के साथ अवैध संबंध बना रहा था. फिरोज खान इंग्लैंड में तो था और इंदिरा के प्रति उसकी बहुत सहानुभूति थी. जल्द ही वह अपने धर्म का त्याग कर,एक मुस्लिम महिला बनीं और लंदन केएक मस्जिद में फिरोज खान से उसकी शादी हो गयी. इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू ने नया नाम मैमुना बेगम रख लिया. उनकी मां कमला नेहरू इस शादी से काफी नाराज़ थी जिसके कारण उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गयी. नेहरू भी इस धर्म रूपांतरण से खुश नहीं थे क्युकी इससे इंदिरा के प्रधानमंत्री बन्ने की सम्भावना खतरे में आ गयी. तो, नेहरू ने युवा फिरोज खान से कहा कि अपना उपनाम खान से गांधी कर लो. परन्तु इसका इस्लाम से हिंदू धर्म में परिवर्तन के साथ कोई लेना - देना नहीं था. यह सिर्फ एक शपथ पत्र द्वारा नाम परिवर्तन का एक मामला था. और फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया है, हालांकि यह बिस्मिल्लाह शर्मा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों ने ही भारत की जनता को मूर्ख बनाने के लिए नाम बदला था. जब वे भारत लौटे, एक नकली वैदिक विवाह जनता के उपभोग के लिए स्थापित किया गया था. इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश को काल्पनिक नाम गांधी मिला. नेहरू और गांधी दोनों फैंसी नाम हैं. जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलती है, वैसे ही इन लोगो ने अपनीअसली पहचान छुपाने के लिए नाम बदले. . के.एन. राव की पुस्तक "नेहरू राजवंश" (10:8186092005 ISBN) में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है संजय गांधी फ़िरोज़ गांधी का पुत्र नहीं था, जिसकी पुष्टि के लिए उस पुस्तक में अनेक तथ्यों कोसामने रखा गया है. उसमे यह साफ़ तौर पे लिखा हुआ है की संजय गाँधी एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नामक सज्जन का बेटा था. दिलचस्प बात यह है की एक सिख लड़की मेनका का विवाह भी संजय गाँधी के साथ मोहम्मद यूनुस के घरमें ही हुआ था. मोहम्मद यूनुस ही वह व्यक्ति था जो संजय गाँधी की विमान दुर्घटना के बाद सबसे ज्यादा रोया था. 'यूनुस की पुस्तक "व्यक्ति जुनून और राजनीति" (persons passions and politics )(ISBN-10: 0706910176) में साफ़ लिखा हुआ है की संजय गाँधी के जन्म के बाद उनका खतना पूरे मुस्लिम रीति रिवाज़ के साथ किया गया था. कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक "the life of Indira Nehru Gandhi (ISBN: 9780007259304) में इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डाला है. यह लिखा है कि इंदिरा का पहला प्यार शान्तिनिकेतन में जर्मन शिक्षक के साथ था. बाद में वह एमओ मथाई, (पिता के सचिव) धीरेंद्र ब्रह्मचारी (उनके योग शिक्षक) के साथ और दिनेश सिंह (विदेश मंत्री) के साथ भी अपने प्रेम संबंधो के लिए प्रसिद्द हुई.पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंदिरा गांधी के मुगलों के लिए संबंध के बारे में एक दिलचस्परहस्योद्घाटन किया अपनी पुस्तक "profiles and letters " (ISBN: 8129102358) में किया. यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान की सरकारी यात्रा पर गयी थी . नटवरसिंह एक आईएफएस अधिकारी के रूप में इस दौरे पे गए थे. दिन भर के कार्यक्रमों के होने के बाद इंदिरा गांधी को शाम में सैर के लिए बाहर जाना था . कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद,इंदिरा गांधी बाबर की कब्रगाह के दर्शन करना चाहती थी, हालांकि यह इस यात्रा कार्यक्रम में शामिल नहींकिया गया. अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने उनकी इस इच्छा पर आपत्ति जताई पर इंदिरा अपनी जिद पर अड़ी रही . अंत में वह उस कब्रगाह पर गयी . यह एक सुनसान जगहथी. वह बाबर की कब्र पर सर झुका कर आँखें बंद करके कड़ी रही और नटवर सिंह उसके पीछे खड़े थे . जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना समाप्तकर ली तब वह मुड़कर नटवर से बोली "आज मैंने अपने इतिहास को ताज़ा कर लिया (Today we have had our brush with history ". यहाँ आपको यह बता दे की बाबर मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक था, और नेहरु खानदान इसी मुग़ल साम्राज्य से उत्पन्न हुआ. इतने सालो से भारतीय जनता इसी धोखे मेंहै की नेहरु एक कश्मीरी पंडित था....जो की सरासर गलत तथ्य है..... इस तरह इन नीचो ने भारत में अपनी जड़े जमाई जो आज एक बहुत बड़े वृक्ष में तब्दील हो गया हैं , जिसकी महत्वाकांक्षी शाखाओ ने माँ भारती को आज बहुत जख्मी कर दिया हैं ,,यह मेरा एक प्रयास हैं आज ,,कि आज इस सोशल मीडिया के माध्यम से ही सही मगर हकीकत से रूबरू करवा सकू !!! ,,,बाकी देश के प्रति यदि आपकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती हो , तो अबआप लोग '' निःशब्द '' ना बनियेगा ,, इसे फैला दीजिए हर घर में ।

Saturday, August 17, 2013

बम बनाने में माहिर 70 साल का आतंकी टुंडा गिरफ्तार, एक साल में किए थे 24 धमाके !

बम बनाने में माहिर 70 साल का आतंकी टुंडा गिरफ्तार, एक साल में किए थे 24 धमाके !

एक 70 साल के आतंकवादी अब्दुल करीम टुंडा को िदल्ली पुिलस ने गिरफ्तार कर के बहुत बड़ा तीर मार दिया है कया ? अब इसका मुफ्त इलाज और बिरयानी के खर्च का बोझ तो देश के जनता को ही उठना पड़ेगा । क्यों गिरफ्तार किया, अब बुढापे में देश की जनता के टेक्स के पैसे पर जेल में अय्याशी करेगा, इस आतन्कवादी को उसी वक़्त उड़ा देना था ।

Monday, July 22, 2013

संघ ने कहा, आइएम के प्रवक्ता की तरह बोल रहे हैं शकील अहमद

Updated on: Mon, 22 Jul 2013 08:47 PM 

संघ ने कहा, आइएम के प्रवक्ता की तरह बोल रहे हैं शकील अहमद
नई दिल्ली। शकील अहमद और रशीद मसूद के इंडियन मुजाहिदीन के गठन संबंधी बयान को कांग्रेस ने नामंजूर करते हुए इससे खुद को किनारा कर लिया है। गौरतलब है कि शकील अहमद और पार्टी सांसद राशिद मसूद ने अपने बयान में कहा था कि वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के परिणामस्वरूप इंडियन मुजाहिदीन [आइएम] की नींव पड़ी थी। उधर, संघ ने इस बयान के लिए शकील अहमद की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि वह इस तरह की बातें कर रहे हैं जैसे इंडियन मुजाहिदीन के प्रवक्ता हों। इस बारे में ट्विटर पर संघ के राम माधव ने कहा कि कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे वह उस संगठन के प्रवक्ता हों।
वहीं कांग्रेस की ओर से पार्टी प्रवक्ता रेणुका चौधरी से शकील अहमद के ट्वीट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, यह पार्टी का नजरिया नहीं है। गौरतलब है कि इस टिप्पणी को लेकर रविवार को राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था। उधर, रशीद मसूद की इसी प्रकार की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर भी रेणुका की यही प्रतिक्रिया थी।
हालांकि रेणुका ने दंगों के लिए गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस प्रकार एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया गया, वैसा कहीं देखने को नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि गुजरात में जो कुछ हुआ, जिस प्रकार एक समुदाय के लोगों को मारा गया, इस प्रकार की घटना कहीं किसी जगह नहीं हुई। शकील अहमद ने सोमवार को ट्विटर कर लिखा था कि इंडियन मुजाहिदीन का गठन गुजरात दंगों की वजह से हुआ। ऐसा एनआइए ने अपने आरोपपत्र में कहा है। उसके बावजूद भाजपा और संघ सांप्रदायिक राजनीति से बाज नहीं आ रहे हैं।